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आखिर सोमवार को क्यों नहीं रुक पाया शेयर बाजार में बड़ी गिरावट का सिलसिला?

आरबीआई और सेबी द्वारा भरोसा दिलाने के बावजूद शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट जारी रही। सोमवार को भी सेंसेक्स कारोबार के दौरान 600 पॉइंट्स तक टूट गया था जबकि निफ्टी 11,000 तक के निचले स्तर तक आ गिरा था। आखिरकार, सेंसेक्स 536.58 अंक (1.46%) जबकि निफ्टी 168.20 अंक (1.51%) टूटकर क्रमशः 36,305.02 और 10,967.65 पर बंद + हुआ। सोमवार को मार्केट में फिर से मचे हाहाकार के पीछे कौन-कौन से कारण हैं, जानिए... 


कच्चे तेल की बढ़ती कीमत 
कच्चे तेल की कीमत में हो रही वृद्धि शेयर मार्केट की गिरावट की मुख्य वजह मानी जा रही है। सोमवार को कच्चे तेल की कीम 1.83 पैसे बढ़कर 80.27 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी। इसकी कीमत में उछाल की मुख्य वजह ईरान पर अमेरिका की ओर से लगाई जा रही पाबंदियां हैं। दरअसल, ईरान पर बैन लगाने की तैयारी में अमेरिका ने ओपेक नेशन्स और रूस से तेल के उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने ट्रंप की बात अनसुनी कर दी। इससे कीमत में उछाल आई। 

रुपये में गिरावट 
तेल की बढ़ती कीमत का सीधा असर रुपये पर भी पड़ रहा है। यह लगातार डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है। सोमवार को भी यह डॉलर के मुकाबले 27 पैसे कमजोर होकर 72.47 पर खुला। रुपये में आज की गिरावट की वजह बैकों और आयातकों द्वारा डॉलर की खरीदारी रही। 

नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियों को लेकर शंका 
शुक्रवार को भारी गिरावट के बाद DHFL सोमवार को तो संभाल गया, लेकिन पीएनबी हाउसिंग, कैन फाइनैंस होम्स जैसी नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियों में गिरावट जारी रही। इसका पूरे बाजार के कारोबार पर असर हुआ क्योंकि निवेशकों को लग रहा है कि कई अन्य नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियां अपनी हैसियत बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही हैं। 

फेडरल रिजर्व की मीटिंग 
25 और 26 सितंबर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मीटिंग होनी है। रेटिंग एजेंसी नोमुरा का अनुमान है कि मीटिंग में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स तक की वृद्धि हो सकती है। उसका कहना है कि चूंकि अमेरिका की आर्थिक वृद्धि अनुमान से ज्यादा हुई है, इसलिए फेडरल रिजर्व इस वर्ष ब्याज दरें बढ़ाने का सिलसिला जारी रखेगा। उसके बढ़ने से भारत जैसे उभरते बाजारों में लिक्विडिटी की कमी हो सकती है जो पहले से ही अपनी करंसी की कमजोरी से चिंतित हैं। आंकड़े बताते हैं कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों जनवरी से अब तक 8,837.92 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटीज बेच चुके हैं। 2017 की इसी अवधि में यह रकम महज 49,729 करोड़ रुपये थी। 

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